नमस्कार...


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Tuesday, October 25, 2011

दीपों की रहे जगमग

दीपों की रहे जगमग, जीवन में ना अँधेरा हो
माँ लक्ष्मी का आपके घर आँगन में बसेरा हो
धन, वैभव, ऐश्वर्य, पैसे की ना कोई कमी हो
उल्लास, आनन्द, तेज, ज्ञान के आप धनी हो
सुख, समृद्धि, सम्पन्नता दस्तक दे आपके द्वार
दीपावली के पर्व पर आपको खुशियाँ मिले अपार.

ऐसी ही कामनाओं के साथ आपको एवं आपके परिवार को दीपावली पर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ...
-विभोर गुप्ता 

Wednesday, October 5, 2011

दशरथ-नंदन अवतार नहीं धरता-



विजयादशमी के पावन अवसर पर मेरे पास इससे अच्छी कोई रचना नही है. कृपया अपनी प्रतिक्रियाएं देकर इस रचना को सुभाशीष प्रदान करे. 



मेरे देश की भूमि भयभीत है दानवों के आतंक से,
           फिर भी कोई दशरथ-नंदन यहाँ अवतार नहीं धरता
मशालों पर भी कहर बन जाती है निशाचरों की भीड़,
          पुतले जलाने से रावन का वंश कभी मिटा नहीं करता

आज भी जाने कितने सीता-हरण होते है देश में
कितने रावण ढोंग करते है पाखंडियों के वेश में 
स्वर्ण-मृग बन मारीच फिर जानकियों को ललचाता है 
कितनी सीताओं की मर्यादाओं पर काल मंडराता है 

धन और बल की आड़ में निर्भीक बन गए है रावण,
          खींच लो कितनी भी, किसी लक्ष्मण रेखा से नहीं डरता

मेरे देश की भूमि भयभीत है दानवों के आतंक से,
           फिर भी कोई दशरथ-नंदन यहाँ अवतार नहीं धरता

कुम्भकर्णों के पेट भरे किन्तु फिर भी खा रहे है 
बच्चें बिलखते भूख से, पर वो दूध से नहा रहे है 
तिजोरियां भर, सात पीढ़ियों के लिए सपने संजोते है 
भले प्रजा चीखती रहे, वो महलों में चैन से सोते है 

चारा, यूरिया, ताबूत, स्पेक्ट्रम जाने क्या-क्या खाया,
          कितना भी खा ले किन्तु कुम्भकर्णों का पेट नहीं भरता 

मेरे देश की भूमि भयभीत है दानवों के आतंक से,
           फिर भी कोई दशरथ-नंदन यहाँ अवतार नहीं धरता

इन्द्रजीत ने बाँध दिया है देवों को बंधन में 
आज जहरीले सर्पों ने विष घोल दिया है चन्दन में 
धर्म-अधर्म के युद्ध में, अधर्म का पलड़ा भारी है 
निष्ठावादियों की सेनायें, भ्रष्ट कपटियों से हारी है 

आज कोई विभीषण भी तो नहीं, जो भेद ही बतला दे,
           बार-बार शीश काटने  पर भी दशानन नहीं मरता

मेरे देश की भूमि भयभीत है दानवों के आतंक से,
           फिर भी कोई दशरथ-नंदन यहाँ अवतार नहीं धरता


-विभोर गुप्ता  


Wednesday, September 28, 2011

भगत सिंह की जयंती पर कुछ पंक्तियाँ-



क़र्ज़ तूने चुकाया था अपनी माँ के दूध का, 
        पर तेरी शहादत का क़र्ज़ ना चुकेगा कभी
तेरी मजार पर भले ही ना चिराग जलते हो, 
        पर तेरी कुर्बानी का दीप ना बुझेगा कभी
क्रांति की जो मशाल जलाई थी तूने भगत, 
        उस मशाल के आगे अँधियारा ना रूकेगा कभी
भले ही सिंहासन पर तेरा वंश ना हो कोई, 
        पर इतिहास तेरे शौर्य को ना भूलेगा कभी.

-विभोर गुप्ता

माँ भवानी अवतार धरो-

यह रचना अति स्नेहदाता अग्रज दीपक सिंघल को समर्पित है. मैं बचपन से ही उनके अति दुलार और अत्यधिक सहयोग की छाँव में पला हूँ. माँ दुर्गा उन्हें धन, वैभव, ऐश्वर्य, और सुख प्रदान करे|


देवों की पावन भूमि देवियों से खाली हुई,
         भारत के संकट हरने माँ भवानी अवतार धरो
धर्म, निष्ठा के सामने आसुरी शक्तियां प्रबल  हुई,
         निशाचरों  के विनाश को माँ वाणी में ललकार भरो
अष्ट भुजाओं वाली, दुर्गे माँ  शेरावाली,
         कर अपने त्रिशूल, गदा, तीर, चक्र, तलवार धरो
भ्रष्ट, दुष्ट, पापी, माँ का दूध जो लजाते रहे,
         मुंडी उखाड़ ऐसे दुष्टों का अब संहार करो.

सूरज की किरणों को अँधियारा है निगल रहा,
         माँ दुर्गे अपने तेज से अंधियारे पर प्रहार करो
कन्या रुपी देवियों को कोख में जो मारते है,
         ऐसे पापियों को दण्डित कर, जग पर उपकार करो
विश्व को दो सद्ज्ञान, नारी का करे सम्मान,
          जन-जन का कल्याण कर, देश के दूर विकार करो
मेरे अँधेरे जीवन में भी ज्ञान की ज्योति जलाओ,

          आशीष बरसा माँ ब्रह्मानी मेरा भी उद्धार करो.
-विभोर गुप्ता 

Friday, September 16, 2011

पेट्रोल की बढ़ी कीमत


कहीं हल्ला होगा, कहीं पर शोर होगा
कहीं पुतले जलेंगे, कहीं नारों का जोर होगा
कोई सरकार को दोष देगा
तो कोई महंगाई को कोसेगा
कोई आज बाईक से नही, बस से जायेगा
तो कोई आज एक रोटी कम खायेगा
पर दो-चार दिन में जिन्दगी वहीँ पर आ जायेगी
पेट्रोल की बढ़ी कीमत कहीं एडजस्ट हो ही जाएगी.
-विभोर गुप्ता

Monday, September 12, 2011

क्रांति-ज्वाला पुस्तक

प्रिय मित्रों,
मेरी प्रथम पुस्तक क्रांति-ज्वाला प्रकाशित हो चुकी है. इस पुस्तक में जनलोकपाल बिल के लिए चलाये गये, अन्ना हजारे द्वारा आन्दोलन के दौरान लिखी मेरी सभी रचनाओं का संग्रह है.
आप इस पुस्तक को डाउनलोड कर सकते है. डाउनलोड करने के लिए लिंक पर क्लिक करे
आप इसे अपने मित्रों को भी भेज सकते है.
आपकी प्रतिक्रियाओं का स्वागत है.

धन्यवाद

-विभोर गुप्ता

https://docs.google.com/viewer?a=v&pid=explorer&chrome=true&srcid=0B0LLC_QlJ7k1ZWE3OGM5ZDEtNTZjMC00MjU1LWIwZGMtYThhNTBlYjA1YjRi&hl=en_US&pli=1

Wednesday, August 24, 2011

अपाहिज सत्ता-


राजनीति की कीचड से आज संसद की गलियाँ गन्दी है
सत्य, धर्म, ईमानदारी तो खादी के घर में बन्दी है
अंधियारों में खोट दिखाई नहीं देगी उनको, चूंकि
नैतिकता का चश्मा टूट गया, इसलिए सत्ता अंधी है.

यूं तो कहने को सरकार लोकतंत्र की प्रहरी है
पर आजकल तो उसे भी आई नींद गहरी है
पूरा देश चीख रहा है, अन्ना तुम संघर्ष करो
पर आवाजें सुनाई नहीं देती क्योंकि सत्ता बहरी है.

गद्दी पर जो बैठे है उनका काम ही है दलाल का
क्यों चाहे वो बने सख्त कानून जनलोकपाल का
देश ने पूछा उनसे, तुम भ्रष्टाचार क्यों मिटाते नहीं
पर जब शासन हो गूंगा तो कैसे जवाब दे वो सवाल का.

वो भ्रष्टाचार मिटाने की बातें तो करते दिन-रात है
पर पर्दों के पीछे वो घोटालेबाजों के ही साथ है
हमने कहा, दण्डित करो कलमाड़ी और राजाओं को
पर कैसे, सत्ता के पास तो हाथ है ना लात है.

गांधी वाली खादी अब ईमानदारी से विहीन हो गयी
माँ भारती अब तानाशाहों के घर में पराधीन हो गयी
गूंगे भी है, बहरें भी है, अन्धें भी है, लंगड़े भी है
लगता है दिल्ली अब नाकारे अपाहिजों के आधीन हो गयी.
-विभोर गुप्ता