नमस्कार...


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Wednesday, September 28, 2011

भगत सिंह की जयंती पर कुछ पंक्तियाँ-



क़र्ज़ तूने चुकाया था अपनी माँ के दूध का, 
        पर तेरी शहादत का क़र्ज़ ना चुकेगा कभी
तेरी मजार पर भले ही ना चिराग जलते हो, 
        पर तेरी कुर्बानी का दीप ना बुझेगा कभी
क्रांति की जो मशाल जलाई थी तूने भगत, 
        उस मशाल के आगे अँधियारा ना रूकेगा कभी
भले ही सिंहासन पर तेरा वंश ना हो कोई, 
        पर इतिहास तेरे शौर्य को ना भूलेगा कभी.

-विभोर गुप्ता

माँ भवानी अवतार धरो-

यह रचना अति स्नेहदाता अग्रज दीपक सिंघल को समर्पित है. मैं बचपन से ही उनके अति दुलार और अत्यधिक सहयोग की छाँव में पला हूँ. माँ दुर्गा उन्हें धन, वैभव, ऐश्वर्य, और सुख प्रदान करे|


देवों की पावन भूमि देवियों से खाली हुई,
         भारत के संकट हरने माँ भवानी अवतार धरो
धर्म, निष्ठा के सामने आसुरी शक्तियां प्रबल  हुई,
         निशाचरों  के विनाश को माँ वाणी में ललकार भरो
अष्ट भुजाओं वाली, दुर्गे माँ  शेरावाली,
         कर अपने त्रिशूल, गदा, तीर, चक्र, तलवार धरो
भ्रष्ट, दुष्ट, पापी, माँ का दूध जो लजाते रहे,
         मुंडी उखाड़ ऐसे दुष्टों का अब संहार करो.

सूरज की किरणों को अँधियारा है निगल रहा,
         माँ दुर्गे अपने तेज से अंधियारे पर प्रहार करो
कन्या रुपी देवियों को कोख में जो मारते है,
         ऐसे पापियों को दण्डित कर, जग पर उपकार करो
विश्व को दो सद्ज्ञान, नारी का करे सम्मान,
          जन-जन का कल्याण कर, देश के दूर विकार करो
मेरे अँधेरे जीवन में भी ज्ञान की ज्योति जलाओ,

          आशीष बरसा माँ ब्रह्मानी मेरा भी उद्धार करो.
-विभोर गुप्ता 

Friday, September 16, 2011

पेट्रोल की बढ़ी कीमत


कहीं हल्ला होगा, कहीं पर शोर होगा
कहीं पुतले जलेंगे, कहीं नारों का जोर होगा
कोई सरकार को दोष देगा
तो कोई महंगाई को कोसेगा
कोई आज बाईक से नही, बस से जायेगा
तो कोई आज एक रोटी कम खायेगा
पर दो-चार दिन में जिन्दगी वहीँ पर आ जायेगी
पेट्रोल की बढ़ी कीमत कहीं एडजस्ट हो ही जाएगी.
-विभोर गुप्ता

Monday, September 12, 2011

क्रांति-ज्वाला पुस्तक

प्रिय मित्रों,
मेरी प्रथम पुस्तक क्रांति-ज्वाला प्रकाशित हो चुकी है. इस पुस्तक में जनलोकपाल बिल के लिए चलाये गये, अन्ना हजारे द्वारा आन्दोलन के दौरान लिखी मेरी सभी रचनाओं का संग्रह है.
आप इस पुस्तक को डाउनलोड कर सकते है. डाउनलोड करने के लिए लिंक पर क्लिक करे
आप इसे अपने मित्रों को भी भेज सकते है.
आपकी प्रतिक्रियाओं का स्वागत है.

धन्यवाद

-विभोर गुप्ता

https://docs.google.com/viewer?a=v&pid=explorer&chrome=true&srcid=0B0LLC_QlJ7k1ZWE3OGM5ZDEtNTZjMC00MjU1LWIwZGMtYThhNTBlYjA1YjRi&hl=en_US&pli=1

Wednesday, August 24, 2011

अपाहिज सत्ता-


राजनीति की कीचड से आज संसद की गलियाँ गन्दी है
सत्य, धर्म, ईमानदारी तो खादी के घर में बन्दी है
अंधियारों में खोट दिखाई नहीं देगी उनको, चूंकि
नैतिकता का चश्मा टूट गया, इसलिए सत्ता अंधी है.

यूं तो कहने को सरकार लोकतंत्र की प्रहरी है
पर आजकल तो उसे भी आई नींद गहरी है
पूरा देश चीख रहा है, अन्ना तुम संघर्ष करो
पर आवाजें सुनाई नहीं देती क्योंकि सत्ता बहरी है.

गद्दी पर जो बैठे है उनका काम ही है दलाल का
क्यों चाहे वो बने सख्त कानून जनलोकपाल का
देश ने पूछा उनसे, तुम भ्रष्टाचार क्यों मिटाते नहीं
पर जब शासन हो गूंगा तो कैसे जवाब दे वो सवाल का.

वो भ्रष्टाचार मिटाने की बातें तो करते दिन-रात है
पर पर्दों के पीछे वो घोटालेबाजों के ही साथ है
हमने कहा, दण्डित करो कलमाड़ी और राजाओं को
पर कैसे, सत्ता के पास तो हाथ है ना लात है.

गांधी वाली खादी अब ईमानदारी से विहीन हो गयी
माँ भारती अब तानाशाहों के घर में पराधीन हो गयी
गूंगे भी है, बहरें भी है, अन्धें भी है, लंगड़े भी है
लगता है दिल्ली अब नाकारे अपाहिजों के आधीन हो गयी.
-विभोर गुप्ता

Tuesday, August 16, 2011

तानाशाही सत्ता-


तानाशाही सत्ता के आगे लोकतंत्र कहाँ जिन्दा है
आंसू भर-भर कर आज तिहाड़ जेल भी शर्मिंदा है
तिरंगे ने बोला है आज, लाल किले की दीवारों से
तेरी ईंटों को भी खतरा है अब, तेरे ही पहरेदारों से

राजघाट चीख रहा है सत्याग्रह के अपमानों पर
कैसा खून बिखेरा तुमने ये गाँधी के अरमानो पर
प्रजा के सेवक प्रजा के अधिकारों का दमन कर बैठे
शांति के राही को ही अशांति जुर्म में अन्दर भर बैठे

लगता है शायद तुम जनता की ताकत को भूल गए
सत्ता के मद में होकर चूर, अत्याचारों में झूल गए
अब वक़्त आ गया है, तुम्हारी औकातें बतलाने का
तुम हिटलरों को जन-गण-मन की ताकत दिखलाने का

देखते है तुम अब किस-किस को भरोगे जेलों में
जाग्रित जनता निकल पड़ी है सडकों, बसों, रेलों में
अब और तुम अपनी मनमर्जी नहीं चला पाओगे
मनमर्जी तो तब चलेगी गर गद्दी पर टिक जाओगे.
-विभोर गुप्ता

काले अंग्रेज-


जिनके चेहरे काले है काले कारनामों से,
       वो अब गोरों अंग्रेजों के भी बाप बन गए है
भ्रष्टाचार मिटाने की किसे पड़ी है यारों,
        वो सब जनता के लिए अभिशाप बन गए है
कर गिरफ्तार अन्ना हजारे को आज वो
        सत्याग्राही गांधी के विरुद्ध पाप बन गए है
अंग्रेज तो अब देश से चले गए है इसीलिए
         सत्ताधारी ही फिरंगी अपने आप बन गए है
-विभोर गुप्ता