आज "स्वामी विवेकानंद जयंती" और "युवा दिवस" पर एक छंद प्रस्तुत करता हूँ-
हिन्दुस्तानी अपने आदर्श, मान, सम्मान कहाँ खो रहे
सभ्यता, संस्कृति, संस्कार के धनी देश वाले,
पश्चिम के रीति-रिवाजों को अपनी पीठ क्यूं है ढो रहे
युवाओं की ख़ामोशी और देश की बदहाली देख,
श्री रामकृष्ण परमहंस आज आँखें भर-भर रो रहे
युवाओं को जगाने हेतु बने जो विवेकानंद,
ऐसे नरेंद्र भला आज देश में क्यूं नहीं है पैदा हो रहे
-विभोर गुप्ता
No comments:
Post a Comment