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Thursday, February 3, 2011

नाबालिग और सिगरेट



बैठा था मैं, चाय की दुकान पर, इलाका था धौला कुआं
मिला एक देश का भविष्य, उड़ाते हुए सिगरेट का धुंआ
पूछा उससे मैंने, अरे बच्चे उम्र है कितनी तेरी
इतराते हुए बोला, उम्र है तेरह बरस की मेरी
मैंने कहा, सिगरेट पी रहा है, क्या शर्म तुझे आती नही
बोला, सिगरेट ही पी रहा हूँ, कोई डाका डाला नहीं कहीं
ये तू सिगरेट पी रहा है, ये क्या किसी डाके से कम है
तेरह बरस का है तू मासूम, तुझे किस बात का गम है
बोला, ओ ओ अंकल, चाय पीओ, ज्यादा टेंशन मत लो
ये गाँधी के उपदेश अपने पास ही रखो, मुझे मत दो
आजाद देश का नागरिक हूँ, मुझे कोई रोक सकता नहीं
पीता हूँ अपने पैसों की, किसी के बाप से मैं डरता नहीं

सही है तो कह रहा है वो, कि वो आजाद है
तो किस बात पर मेरा और उसका विवाद है
शर्म तो आनी चाहिए उस बोर्ड पर, जिस पर लिखा है
18 से कम आयु के बच्चे को तम्बाकू बेचना अपराध है!!!



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2 comments:

  1. aap ki kavita nay mujhay bahaut parbhavit kiya hai.

    keep it up

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  2. bhut bhut aabhar aapka sanjay ji...

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