नमस्कार...
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Wednesday, December 28, 2011
Wednesday, December 21, 2011
श्रीमदभगवद गीता पर प्रतिबंध-
हाल ही में रूस द्वारा श्रीमद भगवद गीता पर प्रतिबंध लगाया जा रहा है| इस सन्दर्भ में मेरी एक नई रचना कुछ मुक्तकों द्वारा..... आप सभी के स्नेह एवं आशीष को आतुर...
भगवत गीता पर कैसा मचा हुआ बवाल विदेश में
हिन्दुस्तानी संस्कृति, सभ्यता पर प्रतिबंध लगने लगा
किन्तु सत्ता लोभियों के रक्त में नहीं कोई उबाल देश में |
चुप्पी क्यों साधे है हिन्दू, अपने विशाल देश में
कोई दूसरा धर्म होता तो आ जाता महाकाल देश में
रणभूमि में कर्म की रीत को पढ़ाने वाले पाठ का
अपमान हो रहा, आदर्श और शिष्टाचार से कंगाल देश में |
राम, कृष्ण की भूमि पर हो रहे अजब कमाल देश में
सिंहों का वंश ओढ़े हुआ गीदड़ की खाल देश में
आज गीता पर प्रतिबंध, कल रामायण पर लगेगा
हिन्दू संस्कृति को नष्ट करने की है ये चाल विदेश में |
-विभोर गुप्ता
Monday, December 19, 2011
"टूटते सितारों की उड़ान"
मेरी नई पुस्तक "टूटते सितारों की उड़ान" एक अनोखा काव्य संग्रह...जिसमें आपको हर रस और रंग की 166 कवितायें एक साथ पढ़ने का मौका मिलेगा...यह काव्य संग्रह अब आपको प्राप्त हो सकती है.....इस काव्य संग्रह को प्राप्त करने के लिये और अपनी प्रति सुनिश्चित कराने के लिए आज ही सम्पर्क करे....
सत्यम शिवम्- 9934405997
Thursday, December 15, 2011
कोटि-कोटि नमन-
आज विजय दिवस पर उन सभी शहीदों को श्रद्धांजलि स्वरुप एक मुक्तक, जिन्होंने 1971 के युद्ध में अपने आप को देश के लिए न्यौछावर कर दिया था|
कोटि-कोटि नमन है, जिन्होंने अपनी जान गंवाई थी
भारत माँ की रक्षा की खातिर सीने पर गोली खायी थी
इस धरती के लिए कितना शुभ मंगल दिन होगा वो
जब बलिदानी माँ की कोखों ने ऐसी संताने जन्माई थी|
-विभोर गुप्ता
कोटि-कोटि नमन है, जिन्होंने अपनी जान गंवाई थी
भारत माँ की रक्षा की खातिर सीने पर गोली खायी थी
इस धरती के लिए कितना शुभ मंगल दिन होगा वो
जब बलिदानी माँ की कोखों ने ऐसी संताने जन्माई थी|
-विभोर गुप्ता
Wednesday, November 30, 2011
जागो कलमकारों
देश में आज-कल का माहौल ही कुछ ऐसा ही कि लिखना पड़ रहा है.......
राजशाह लूट-लूट खजाना अपने तहखानें भर रहे है,
जागो कलमकारों, अपनी कलम से अब देश जगाओ
अरे, वतन के ठेकेदार, वतन का सौदा कर रहे है |
-विभोर गुप्ता
Saturday, November 26, 2011
सरदारनी ने जन्म दिया
26 नवम्बर 2008 में मुंबई में आतंकी हमले के बाद भी भारतीय प्रधानमंत्री के खून गरम नहीं होने पर मैंने एक छंद लिखा था| आज तीन साल बाद उसे आपके सामने प्रस्तुत कर रहा हूँ|
सरदारनी ने जन्म दिया, सरदारनी का दूध पिया,
......................सरदारनी के आँचल की छाँव तुम पले हो
पगड़ी बाँध बन जट, सिंह उपनाम रख,
.....................गुरु गोविन्द के अनुयायियों का वेश तुम ढले हो
आन-बान-शान पर जान को लुटाने वाले
....................सिक्खों का इतिहास भूल किस हाथ तुम छले हो
कैसा ये तुम्हारा राज, कहाँ है कृपाण आज,
...................शौर्य को ठुकराकर कायरता की किस राह तुम चले हो |
-विभोर गुप्ता
सरदारनी ने जन्म दिया, सरदारनी का दूध पिया,
......................सरदारनी के आँचल की छाँव तुम पले हो
पगड़ी बाँध बन जट, सिंह उपनाम रख,
.....................गुरु गोविन्द के अनुयायियों का वेश तुम ढले हो
आन-बान-शान पर जान को लुटाने वाले
....................सिक्खों का इतिहास भूल किस हाथ तुम छले हो
कैसा ये तुम्हारा राज, कहाँ है कृपाण आज,
...................शौर्य को ठुकराकर कायरता की किस राह तुम चले हो |
-विभोर गुप्ता
Sunday, November 13, 2011
अपने छोटू का बाल दिवस
आज सुबह सुबह बाल दिवस के दिन जब मैंने कुछ छोटे छोटे बच्चों को दुकानों पर काम करते देखा तो मुझे लगा कि देश कि उन्नति और विकास का उन बच्चों का क्या लाभ मिल रहा है? एक ताजी रचना आपके सामने प्रस्तुत कर रहा हूँ, आपकी प्रतिक्रिया आमंत्रित है|
और कुछ सालों से अर्थव्यवस्था का सूचकांक भी ऊपर चढ़ा है
वास्तव में अब गाँव की गलियों तक भी काली सड़कें आती है
और अब गोरी भी गगरी लेकर पानी भरने दूर नहीं जाती है
देश का नेता हर नुक्कड़ पर विकास के ढोल बजाता है
किन्तु अपना छोटू तो आज भी हवेली में ही झाडू लगाता है |
अब तो हर बच्चे को मिला हुआ शिक्षा का अधिकार है
सस्ते दामों पर कंप्यूटर उपलब्ध करा रही सरकार है
विदेशी विश्वविधालय देश में अपनी शाखाएं खोल रही है
नई पीढियां एक साथ कई-कई भाषाएँ बोल रही है
गली-गली में सर्व शिक्षा अभियान की किरण दिखाई देती है
किन्तु अपने छोटू को तो बस मालिक की डांट सुनाई देती है |
महात्मा गाँधी के नाम पर गारंटीड रोजगार मिलता है
बड़े बाबू को भी अब वेतन तीस हज़ार मिलता है
अब कोई किसी को भी कम मजदूरी पर नहीं रख सकता है
और बंधुआ मजदूर भी श्रम विभाग में केस दर्ज कर सकता है
किन्तु बाल श्रम निरोधक कानून उस समय कहाँ सोता है
जब अपना छोटू चाय की दुकान पर झूठे बर्तन धोता है |
-विभोर गुप्ता
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