नमस्कार...
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Thursday, June 23, 2011
Tuesday, June 21, 2011
आत्महत्या का अधिकार-
ना चहिये मुझे सूचना का अधिकार,
ना ही चहिये मुझे शिक्षा का अधिकार
गर कर सकते हो मुझ पर कोई उपकार
तो दे दो मुझे आत्महत्या का अधिकार
क्या करूँगा मैं अपने बच्चों को स्कूलों में भेजकर
जबकि मैं खाना भी नही खिला सकता उन्हें पेटभर
भूखा बचपन सारी रात, चाँद को है निहारता
पढ़ेगा वो क्या खाक, जिसे भूखा पेट ही है मारता
और अगर वो लिख-पढ़ भी लिए ,तो क्या मिल पायेगा उन्हें रोजगार
नही थाम सकते ये बेरोजगारी तो दे दो मुझे आत्महत्या का अधिकार
मेरे लिए, सैकड़ो योजनाये चली हुई है, सरकार की
सस्ता राशन, पक्का मकान, सौ दिन के रोजगार की
पर क्या वास्तव में मिलता है मुझे इन सब का लाभ
या यूँ ही कर देते हो तुम, करोड़ो-अरबो रुपये ख़राब
अगर राजशाही से नौकरशाही तक, नही रोक सकते हो यह भ्रष्टाचार,
तो उठाओ कलम, लिखो कानून, और दे दो मुझे आत्महत्या का अधिकार.
कभी मौसम की मार, तो कभी बीमारी से मरता हूँ
कभी साहूकार, लेनदार का क़र्ज़ चुकाने से डरता हूँ
दावा करते हो तुम कि सरकार हम गरीबों के साथ है
अरे सच तो ये है, हमारी दुर्दशा में तुम्हारा ही हाथ है
मत झुठलाओ इस बात से, ना ही करो इस सच से इंकार
नहीं लड़ सकता और जिन्दगी से, दे दो मुझे आत्महत्या का अधिकार
मैं अकेला नही हूँ, जो मांगता हूँ ये अधिकार,
साथ है मेरे, गरीब मजदूर, किसान और दस्तकार
और वो, जो हमारे खिलाफ आवाज उठाते है
खात्मा करने को हमारा, कोशिशें लाख लगाते है
पूर्व से पश्चिम तक, उत्तर से दक्षिण तक, मचा है हाहाकार
खत्म कर दो किस्सा हमारा, दे दो मुझे आत्महत्या का अधिकार
क्यों कर रहे हो इतना सोच विचार
जब चारो और है बस यही गुहार
खुद होंगे अपनी मौत के जिम्मेदार
अब तो दे ही दो, आत्महत्या का अधिकार.
- विभोर गुप्ता (9319308534)
Saturday, June 18, 2011
छंद (राहुल-विवाह)-
वरुण की शादी होने के बाद, ताई जी ने कहा
बेटा राहुल, अपनी शादी तुम कब करवाओगे
तुम्हारे कुंवारेपन पर, मुझे ताने मरते है सब
बोलो सुसंस्कारी, सुलक्ष्मी बहु कब लाओगे
तुम्हारी उम्र की सब लडकियाँ ब्याही गयी
क्या सभी के बच्चों के मामा तुम ही कहलाओगे
कर लो शादी जल्दी प्यारे, ताक में है कवि सारे
खुद को क्या दूसरा अटल बिहारी लिखवाओगे.
क्षमा करना मम्मी जी, मैं दर्द आपका हूँ समझूं
पर क्या करूँ, कोई लड़की मुझको जंचती ही नही है
राजनीति भी करे और संभाले जो राज-पाट
ऐसी गुणवान कोई दिल में मेरे बसती ही नही है
जिसको बना डालूँ आपके घर की बहुरानी
ऐसी कोई सुकुमारी मेरी तरफ हंसती ही नहीं है
मैं तो डालता हूँ दाना कुड़ियों को रात-दिन
पर कन्या कुंवारी कोई जाल में फंसती ही नही है.
-विभोर गुप्ता (9319308534)
Friday, June 17, 2011
शराब-
जब थे कभी अनजान इससे, तब लुभाया शराब ने
जो नही किया था वादा कभी, वो भी निभाया शराब ने
हम तो जिया करते थे तन्हा ही, जिन्दगी को
ना जाने किन-किन चेहरों से मिलवाया शराब ने
नही था कोई जूनून, कुछ सिखने का दिल में,
तब इस दिल को, जाने क्या-क्या सिखाया शराब ने
शौक से जिया करते थे अपने गली-मोहल्लों में,
अपनी गलियीं का भी रस्ता, भटकाया शराब ने
मानते थे लोहा सभी हमारे हिसाब-किताब का,
दो पैग के बाद, गिनतियों को भी भुलाया शराब ने
जहाँ तैरने की कोशिश भी नही, कर सकते थे हम,
उस बीच मझधार में ले जाकर, डुबाया शराब ने
कभी मेरी ताकत का खौफ, तो कभी जमींदारी का रौब,
मेरी जवानी, मेरी कहानी, सब कुछ लुटवाया शराब ने
गर्व से रखा था नाम हमारा, माँ-बाप ने,
शराबी, पियक्कड़, बेवडा नाम दिलाया शराब ने
किसी-किसी को तो दुनिया से ही उठाती शराब है,
पर हमको तो नज़रों में उनकी गिराया शराब ने
हम तो किया करते थे, हमेशा ही परहेज इन सबसे
सीधा-सादे 'विभोर' को शायर बनाया शराब ने
भले ही हिन्दू-मुस्लिम को हो मिलाया शराब ने,
पर अपने सगों को तो बनाया, पराया शराब ने
Thursday, June 16, 2011
तेरी किस्मत
ऐसे क्या तू देखता है, कुएं तेरी किस्मत में है
कोसता किसको है क्या, संघर्ष तेरी किस्मत में है
मंजिल तेरी है चाँद पर, चलना तुझे धरती से है
ना मांग फूलो की सेज, कांटें तेरी किस्मत में है
पंख की तू चाह ना कर, बुलंद कर अपने आप को
भूल जा राहों को गिनना, भटकन तेरी किस्मत में है
आत्मविश्वास की इस डोर में, ना डाल कोई गांठें कभी
उठने की तू आदत बना ले, गिरना तेरी किस्मत में है
चुपचाप यूं ना बैठ तू, दिल की उम्मीदे हार कर
मिलकर तुझको रहेगा, जो भी तेरी किस्मत में है
छोड़ दे आदत पुरानी, हर चीज को ही लपकने की
रख तू अभी पेट खाली, धक्के खाना तेरी किस्मत में है
रुकने का तू नाम ना ले, बस चलता ही चल 'विभोर'
एक बात तू समझ ले, बदकिस्मती तेरी किस्मत मैं है।
-विभोर गुप्ता
कोसता किसको है क्या, संघर्ष तेरी किस्मत में है
मंजिल तेरी है चाँद पर, चलना तुझे धरती से है
ना मांग फूलो की सेज, कांटें तेरी किस्मत में है
पंख की तू चाह ना कर, बुलंद कर अपने आप को
भूल जा राहों को गिनना, भटकन तेरी किस्मत में है
आत्मविश्वास की इस डोर में, ना डाल कोई गांठें कभी
उठने की तू आदत बना ले, गिरना तेरी किस्मत में है
चुपचाप यूं ना बैठ तू, दिल की उम्मीदे हार कर
मिलकर तुझको रहेगा, जो भी तेरी किस्मत में है
छोड़ दे आदत पुरानी, हर चीज को ही लपकने की
रख तू अभी पेट खाली, धक्के खाना तेरी किस्मत में है
रुकने का तू नाम ना ले, बस चलता ही चल 'विभोर'
एक बात तू समझ ले, बदकिस्मती तेरी किस्मत मैं है।
-विभोर गुप्ता
Sunday, June 12, 2011
तानाशाही सत्ता की जय हो
अब तो मैं भी सत्ता के विरुद्ध कभी कुछ नही बोलूँगा
भ्रष्टाचार और कालेधन पर अपना मुंह नही खोलूँगा
अरे, मुझको भी तो अपनी जान बहुत प्यारी है
सच लिखने की ताकत मेरी, सत्ता के आगे हारी है
तो भला मैं, क्यूँ सच बोल कर अपना शीष कटाऊ
अमानवीय सरकार को भला क्यूँ अपना दुश्मन बनाऊ
जो सत्ता सोये हुए लोगो पर लाठी बरसा सकती है
न्याय की प्यासी जनता को बूँद-बूँद तरसा सकती है
जिसने सत्याग्रह का अर्थ ही कभी ना जाना हो
लोकतंत्र में जनता की पुकार को कभी ना माना हो
जिसे दुनिया ने पूजा सदा, वो उसको ठग बतलाती है
आधी रात को लाठिया बरसा मन ही मन मुस्काती है
वो सत्ता भला कलम की ताकत को क्या जानेगी
भ्रष्टाचार से पीड़ित प्रजा के आंसू क्या पहचानेगी
सत्ता के धर्म-अधर्म को अपनी कलम से नही तोलूँगा
अब तो मैं भी सत्ता के विरुद्ध कभी कुछ नही बोलूँगा
आज चली है लाठिया, कल गोली भी चलवा सकते है
सच लिखने के अपराध में मुझे भी अन्दर करवा सकते है
तानाशाह हो चुकी सरकार अब प्रजातंत्र को भूल रही
भ्रष्टाचार में लिप्त सरकार, सत्ता के मद में झूल रही
सिंहासन का राजा कोई, बागडोर किसी और के हाथ में
खरगोशों का शिकार कर रहे, सिंह-सियार दोनों साथ में
कसाब खा रहा बिरयानी, सत्याग्राही लाठिया है खा रहे
देश में आतंक फ़ैलाने वाले, लादेन जैसे सत्ता को भा रहे
सात समंदर पार, सत्ता के दलालों की भर रही है तिजोरिया
और एक योगगुरु को द्रोही बतलाकर कर रहे वो मुंहजोरिया
अब तो लगता है डर, कहीं ना कर दे मुझको भी बदनाम
मैं क्यूँ पडू इस झंझट में, करूँगा मैं सत्ता को सलाम
सिंहासन के फेंके सिक्कों पर, अब तो मैं भी डोलूँगा
अब तो मैं भी सत्ता के विरुद्ध कभी कुछ नही बोलूँगा
अपनी जेब भरने को, मैं दरबारों की जेबे टटोलूँगा
अपनी कडवा सच की कविताओं में झूठ की मिश्री घोलूँगा
अब तो मैं भी सत्ता के विरुद्ध कभी कुछ नही बोलूँगा
भ्रष्टाचार और कालेधन पर अपना मुंह नही खोलूँगा
-विभोर गुप्ता (9319308534)
Wednesday, June 1, 2011
भ्रष्टाचार मिटाओ सत्याग्रह
सत्याग्रह है एक युद्ध, काले धन के विरुद्ध
इस युद्ध में जीवन आहुतियाँ डालने चलो
घायल माँ भारती, आज तुम्हे पुकारती
भारती के पैर के कांटे निकालने चलो
जागो युवा नौजवानों, शूरवीर बलवानों
सिंहासन की बागडोर तुम सँभालने चलो
लगी है दावानल आग, देश के भविष्य जाग
मिटाना है अँधियारा तो आग उछालने चलो
काँप उठा है आज कंस, खत्म करो उसका वंश
सुदर्शन चक्र लेकर कृष्ण भगवान चलो
पाप का नाश करो, जन-जन में उल्लास भरो
रावण की लंका जलाने को हनुमान चलो
अधर्म के विरुद्ध जंग, बाबा रामदेव के संग
लालबहादुर कह रहे, जवान और किसान चलो
क्रांति की चली हवा, हर तरफ है धुंआ
परिवर्तन चाहते हो तो रामलीला मैदान चलो
-विभोर गुप्ता (9319308534)
इस युद्ध में जीवन आहुतियाँ डालने चलो
घायल माँ भारती, आज तुम्हे पुकारती
भारती के पैर के कांटे निकालने चलो
जागो युवा नौजवानों, शूरवीर बलवानों
सिंहासन की बागडोर तुम सँभालने चलो
लगी है दावानल आग, देश के भविष्य जाग
मिटाना है अँधियारा तो आग उछालने चलो
काँप उठा है आज कंस, खत्म करो उसका वंश
सुदर्शन चक्र लेकर कृष्ण भगवान चलो
पाप का नाश करो, जन-जन में उल्लास भरो
रावण की लंका जलाने को हनुमान चलो
अधर्म के विरुद्ध जंग, बाबा रामदेव के संग
लालबहादुर कह रहे, जवान और किसान चलो
क्रांति की चली हवा, हर तरफ है धुंआ
परिवर्तन चाहते हो तो रामलीला मैदान चलो
-विभोर गुप्ता (9319308534)
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